कोरोना का बड़ता संक्रमण और लॉकडाउन

मै रिज़वान एक छोटी सी नौकरी करने वाला लेखन से  मेरा कोई  दूर-दूर तक रिश्ता नहीं रहा है 21  दिन के इस लॉकडाउन के दौरान घर पर समय व्यतीत करते हुए मन में अपने कार्यालय के वरिष्ठ सहयोगी का ख्याल आया जो अक्सर ब्लॉग लिखा करते है उन्हीं से प्रेरित होकर आज कुछ लिखने बैठा हूँ। चीन के वुहान से दिसम्बर 2019 से शुरु हुआ कोरोना वायरस आज विश्व के कई देशों को प्रभावित कर रहा है जिसमें इटली सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है इटली में अब तक 14681 मौते हो चुकी है जबकि जर्मनी में 1277 और भारत में 68 जैसा की चार्ट में दर्शाया गया है :-
ये आंकड़े 04 अप्रैल 2020 तक के है।
Location
Confirmed
Cases per 1M people
Recovered
Deaths

India2,9022.1318468
United States277,985843.5112,2837,146
Italy119,8271,989.0519,75814,681
Spain119,1992,530.7430,51311,198
Germany91,9591,105.9513,5971,277
China81,63958.2376,7513,326
France63,633948.6714,0086,490
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भारत में 68 मरने वालों  में से जिसमें 27 % महिला और 73 % पुरुष  है मरने वालों में ज्यादातर ऐसे लोग है जिन्हे पहले से डॉयबिटीज़ बगैरह थी अथवा जिनकी रोग प्रतिरोधक शक्ति कमजोर है ऐसे कई कारणों से हो  सकता है। हम बात करें लॉकडाउन तो इसे अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरीके से देखा जा सकता है चाहे आंशिक लॉकडाउन हो या पूर्ण लॉकडाउन  हम बात करे अगर जर्मनी की जहाँ 1277 मौतें हुई है फिर भी जर्मनी को पूरी तरह बंद नहीं किया गया यहाँ पब्लिक ट्रांसपोर्ट चालू है जैसे :-  ट्रैन, बस और सामान की आवाजाही हाँ इनकी संख्याओं को कम कर दिया गया है पर बिलकुल बंद नहीं किया गया है लोगों को घरों से काम करने को कहा गया है लोगों को सोशल डिस्टन्सिंग के लिए कहा गया है एक साथ दो लोग आ-जा सकते है कुछ राज्यों में पूर्ण लॉकडाउन है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन नहीं किया गया है स्कूल, कॉलेज की छुट्टियां कर दी गयी है रोजमर्रा के जरुरत के लिए स्टोर खुले हुए है अभी गुजरे 7 दिनों में 5 लाख टेस्ट किये गए है जर्मनी में 13 अप्रैल से प्रत्येक दिन 1 लाख टेस्ट किये जाने की प्रक्रिया की तैयारी की जा रही है। 
यहाँ मेरा जर्मनी से भारत की तुलना करने का कोई इरादा नहीं है समझने वाली बात यह है की दो देश एक ही बीमारी से किस प्रकार लड़ रहे है जर्मनी का कोरोना वायरस से लड़ने का यह तरीका बताता की वह अपने देश के लोगों के प्रति चिंताजनक है और संवेदनशील भी। 
भारत दुनिया की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था है और इस बड़ी अर्थव्यवस्था पर गर्व करते है और हमें यह समझने की जरुरत है दुनिया की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था के देश की स्वास्थ सेवाओं की इतनी ख़राब हालत हो सकती है और हमें इस पर विचार करना चाहिए भारत में टेस्ट की बात की जाये तो 27 मार्च 2020 तक 26798 टेस्ट किये है जो 1.3 अरब की जनसंख्या  को देखते हुए बहुत ही कम है और देशों से तुलना करने का सवाल ही नहीं उठता।
Indian Counsel for Medical Research के चीफ ने 24 मार्च 2020 को कहा की भारत एक दिन में 10000 टेस्ट कर सकता है पर 27 मार्च 2020 तक का औसत लिया जाये तो यह 1100 टेस्ट एक दिन में होने का बैठता है इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की करनी और कथनी में कितना फर्क है। 
हमारे देश की यह खूबी रही है की जब हम अपनी जिम्मेदारियों पर खरे नहीं उतरते तो फिर हम दूसरों पर दोष मड़ने लगते है फिर चाहे फिर चाहे निज़ामुद्दीन मरकज़ की बात क्यों न हो मौलाना साद के दिए गए बयां के अनुसार 21 मार्च 2020 तक उन्होंने जनता कर्फु लगने से पहले मरकज़ में आयी हुई जमातों को रवाना कर दिया था लेकिन जो लोग रास्ते में थे  वो 21 मार्च को अलग-अलग जगहों से मरकज़ में आते रहे जो की वहां जमा हो गए इस तरह से वहां एक मज़मा बन गया गया मौलाना साद द्वारा इसकी जानकारी SHO को दी गयी SHO ने कहा इसकी जानकारी SDM  को दो मौलाना साद ने SDM  से मुलाकात की उनके द्वारा यह कहा गया की हमें लिस्ट दी जाये की कितने लोग है और कहां-कहां से आये हुए है और गाड़ियों का ब्यौरा दे जिन गाड़ियों से इनको भेजना है यह सारी जानकारी SDM को सौंपी गयी लोग ज्यादा और अलग-अलग राज्यों से होने की वजह से SDM ने जाने की इजाजत नहीं दी और उनसे कहा की मरकज़ में ही रुको। और इसके बाद जो मीडिया ने कवरेज किया है वो आप सब जानते है।  मीडिया ने तो इस तरह से कवरेज किया कि भारत में कोरोना मरकज से ही फैला। 

बात लॉकडाउन की करें तो कई तरीके से किया जा सकता था पब्लिक को कुछ दिन पहले इत्तिला किया जा सकता था 21 दिन या जितने भी दिन का लॉकडाउन करना है उसका पब्लिक नोटिस अथवा राष्ट्र के नाम सन्देश जो हमारे प्रधानमंत्री अक्सर देते है दे दिया जाता, जिससे अलग-अलग  जगहों पर घर से दूर काम करने वाले मजदूर अपने घर आ जाते जो लॉकडाउन के समय पैदल सफर कर रहे है। यकायक घोषणा मानव जीवन को किस जगह किस तरह प्रभावित करेगी इसका अंदाजा एयरकंडीशनर वाले रूम में बैठ कर समझा तो जा सकता है  पर जल्दबाजी में नहीं। 

धन्यवाद !!

( ये मेरे अपने विचार है  ) 
    

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    1. मौलाना साद और प्रशासन के बीच घटित घटनाक्रम की मुझे जानकारी है। अभी मुद्दे को अलग दिशा देने में मीडिया लगी है। इसलिए आप और हम जैसे लोगों का कर्तव्य है कि इसकी सही जानकारी लोगों तक पहुंचाएं। मेन स्ट्रीम मीडिया के साथ साथ मरकज में शामिल उन लोगों की भी आलोचना करें जो डॉक्टर, पुलिस और नर्सों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं।

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