मीडिया और सच
भारत में संचार के माध्यम अर्थात मीडिया के अन्तर्गत टेलीविज़न, रेडियो, समाचार पत्र, पत्रिकाएं आदि आते है। भारत में प्रिंट मीडिया की शुरुआत 1780 ई. से हुई। रेडियो ब्रॉडकास्टिंग की शुरुआत 1927 ई. से हुई। भारत की मीडिया स्वतंत्र है। भारत की मीडिया अधिकांश निजी हाथों में है और बड़ी-बड़ी कम्पनियों द्वारा नियंत्रित है। अधिकांश मीडिया लाभ के लिए कार्यरत है जिनके लाभ स्रोत एडवरटाइजिंग, सब्स्क्रिप्शन, कॉपीराइट मटेरियल की सेल इत्यादि।
31 मार्च 2018 तक के आंकड़ों के अनुसार 1,00,000 पब्लिकेशन Registrar of News Paper of India में रेजिस्टर्ड हुए। भारत का न्यूज़ पेपर बाजार विश्व में प्रथम स्थान रखते हुए प्रतिदिन 100 मिलियन न्यूज़ पेपर की कॉपी विक्रय करता है। भारत में 1600 सैटेलाइट चैनलों में से 400 न्यूज़ चैनल है। भारत आज विश्व का अग्रणी समाचार बाज़ार है।
भारतीय मीडिया का इतना व्यापक स्वरुप है की छोटी से छोटी ख़बर भी किसी व्यक्ति से अछूती नहीं रह सकती इस बात से यह समझा जा सकता है कि मीडिया का यह व्यापक रूप जब ख़बरों को पक्षपात और ध्रुवीकरण अथवा सत्यता से परे रूप से परोसेगा तो जन-जन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
हम बात मीडिया के बदलते स्वरुप की कर रहे है। व्यवसायियों, राजनेताओं और सरकारी नौकरशाहों द्वारा नियंत्रित मीडिया के कुछ वर्ग पक्षपाती, प्रेरित रिपोर्टिंग करके अपनी छवि बिगाड़ने के साथ मीडिया और उनसे जुड़े पत्रकारों की पत्रकारिता से भरोसा ऊठे इस प्रकार का काम कर रहे है। यहाँ तक कि ख़बरों का ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
देश कोरोना जैसी महामारी से गुजर रहा है। देश की जनता संयम से काम ले रही है पर इसके विपरीत मीडिया का चेहरा भयावह है मीडिया द्वारा संचालित असत्य और भ्रामक ख़बरों का परिणाम यह है की सहारनपुर पुलिस को " ख़बर बनाम सच " के नाम से नोटिस जारी करना पड़ रहा है।
इसी के चलते फ़िरोजाबाद पुलिस ने एक चैनल को असत्य एवं भ्रामक ख़बरों के लिए चेताया भी है।
मीडिया की पक्षपात व गलत ख़बरों का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने मीडिया चैनलों एवं लिखित प्रकाशित ख़बरों के प्रकाशकों से निवेदन किया है कि " किसी रूप से गलत ख़बर चैनल्स पर न दिखाएं "
भारत जब एक COVID-19 जैसी महामारी से गुजर रहा है इस सवेंदनशील समय में न्यूज़ चैनलों का यह चेहरा सामने आ रहा है। ख़बरों का ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। इस महामारी से एकजुट होकर लड़ने की जरुरत है। देश में 1.30 अरब जनसंख्या के साथ विभिन्न तबके, धर्म, जाति के लोग यहाँ वास करते है। ख़बरों का ध्रुवीकरण करके आप समस्या का समाधान नहीं कर सकते।
जय हिन्द।




बढ़िया लेख 👌👌
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